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Friday, November 27, 2009

उदास गिटार और एक स्‍थगित धुन


प्रेम तब भी बाक़ी थी जब एक परित्‍यक्‍त पल में गिटार सहेज कर रख दिया गया। उसकी उदासी हमारी आंखों से ज्‍़यादा नम थी। आवाज़  देकर अगर उसने रुकने को कहा होता तो शायद अच्‍छा था...। आहूत धुनों की शर्मिन्‍दगी से आंख बचाते हुए हमने सारी हरी कोमल पत्तियों को बुहार दिया....ये बहुत मुश्किल, पर  समझदारी का काम रहा। दिक्‍़क़त नहीं हुई उसे कपड़े में लपेटकर परछत्‍ती तक रख देने  में। हमें पता था उदास गिटार बोलते नहीं ..ज्‍यादातर चुप रहते हैं, जब तक कि किसी स्‍थगित धुन के लिए दी गई क़सम उसे याद न दिला दी जाए...।


फोटो-गूगल से।