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Monday, August 2, 2010

अपने ही घर में दाखि़ल होते हुए

इसे कोताही ही कहा जाना चाहिए। क्‍या एक्‍सक्‍यूज हो सकता है इस बात का आपने महीनों तक अपने ही घर में आने की ज़रूरत नहीं समझी। दीवारें शिकायत कर सकती हैं, और यक़ीनन उनकी बातों का जवाब भी देना मुश्किल हो जाएगा। खै़र हमेशा की तरह इस बार भी ये कह देने में तो कोई हर्ज नहीं कि आगे से ऐसा नहीं होगा और हम इस ब्‍लॉग पर रेगुलर पोस्‍ट लिखते रहेंगे। वैसे मुझे डर है कि लोगों ने इस घर के दरवाजे़ बंद देखकर ये फैसला तो कर ही लिया होगा कि इसमें रहने वाले कहीं और चले गए हैं।
चलिए अपने ही घर में एक बार फिर दाखि़ल होकर देखते हैं.........दरवाज़ा यूं भी सिर्फ भिड़ाया हुआ था बंद नहीं था।