आज बस ये दो लाइनें पढ़ लें-
जा अपने ख़ून दे इल्ज़ाम तों तैनूं बरी कीता..
शहादत देन वाले दा कोई क़ातल नहीं हुंदा ।
कविंदर चांद
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