Monday, October 26, 2009

चुनिन्दा तथ्यों को लिखने का रिवाज़ है


हम कितने ईमानदार होते हैं अक्‍सर...बायोडाटा, अपना प्रोफाइल और अन्‍या जानकारियां देते वक्‍त...। विस्वावा शिम्बोर्स्का की यह कविता यूं ही तो याद नहीं आ गई न...। खै़र पढि़ए, अनुवाद अशोक पांडे का है, हां वही कबाड़ख़ाना वाले।


बायोडाटा लिखना


क्या किया जाना है?
आवेदनपत्र भरो
और नत्थी करो बायोडाटा


जीवन कितना भी बड़ा हो
बायोडाटा छोटे ही अच्छे माने जाते हैं.


स्पष्ट, बढ़िया, चुनिन्दा तथ्यों को लिखने का रिवाज़ है
लैंडस्केपों की जगह ले लेते हैं पते
लड़खड़ाती स्मृति ने रास्ता बनाना होता है ठोस तारीख़ों के लिए.


अपने सारे प्रेमों में से सिर्फ़ विवाह का ज़िक्र करो
और अपने बच्चों में से सिर्फ़ उनका जो पैदा हुए


तुम्हें कौन जानता है
यह अधिक महत्वपूर्ण है बजाए इस के कि तुम किसे जानते हो.
यात्राएं बस वे जो विदेशों में की गई हों
सदस्यताएं कौन सी, मगर किसलिए - यह नहीं
प्राप्त सम्मानों की सूची, पर ये नहीं कि वे कैसे अर्जित किए गए.


लिखो, इस तरह जैसे तुमने अपने आप से कभी बातें नहीं कीं
और अपने आप को ख़ुद से रखा हाथ भर दूर.


अपने कुत्तों, बिल्लियों, चिड़ियों,
धूलभरी निशानियों, दोस्तों, और सपनों को अनदेखा करो.


क़ीमत, वह फ़ालतू है
और शीर्षक भी
अब देखा जाए भीतर है क्या
उसके जूते का साइज़
यह नहीं कि वह किस तरफ़ जा रहा है-
वह जिसे तुम मैं कह देते हो
और साथ में एक तस्वीर जिसमें दिख रहा हो कान
- उसका आकार महत्वपूर्ण है, वह नहीं जो उसे सुनाई देता है.
और सुनने को है भी क्या?
-फ़क़त
काग़ज़ चिन्दी करने वाली मशीनों की खटरपटर.




-चित्र गूगल से साभार

12 comments:

अनिल कान्त : said...

इसे पढ़वाने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

सागर said...

kya kamal ki kavita hai Shayda ji, shukriya... sab sach hai...

AlbelaKhatri.com said...

गज़ब............
अब ऐसे ही लिखूंगा,,,,,,,,,,,,,,हा हा हा

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना प्रेषित की है।आभार।
आईना दिखाती हुई रचना है।

शरद कोकास said...

"जीवन कितना भी बड़ा हो
बायोडाटा छोटे ही अच्छे माने जाते हैं."
शायदा जी..
शिम्बोर्स्का की इन पंक्तियों को पढ़ने के बाद सबसे पहले मैने अपना प्रोफाइल देखा.. मैं तो अपना बायोडाटा छोटा कर रहा हूँ , आपका क्या इरादा है?

बहुत बहुत शुक्रिया शायदा जी, इस खूबसूरत कविता को पढ़वाने के लिये । जो नहीं मानते कि कविता की कोई अहमियत है ज़िन्दगी में, उनके लिये यह ज़रूरी कविता है .. और जो मानते हैं उनके लिये, ज़रूरी कविता है यह ।

sidheshwer said...

एक अच्छी कविता की अच्छी प्रस्तुति !
अज्ञेय की एक कविता है 'जो कहा नहीं गया'..
अकथ को कह जाना वह भी कम शब्दों में..
'कविता क्या है ?' पता नहीं किन्तु यह कविता लगी..क्यूँ ? यह भी शायद पता नहीं ...फिर भी..
शुक्रिया..आपको और अनुवादक को भी...

vijay gaur/विजय गौड़ said...

इस कविता में तो एक स्वाभाविक सहजता होगी ही लेकिन अशोक भाई की भाषा की रवानगी ने उसे इस कदर स्वाभाविक बनाया है कि मुझे तो यह कभी अनुवाद लगी ही नहीं। मित्रों के बीच छेड़ छाड़ के वक्त हर बार याद आ जाने वाली यह कविता मुझे बेहद पसंद है। आभार पढवाने का।

मुनीश ( munish ) said...

Yes but all ppl are not the same . u know i never prepared any bio-data of mine and yes i find filling the profiles on net very useless exercise . i must appreciate this post for the picture of a heart getting hurt, i can imagine the pain .

डॉ .अनुराग said...

जीवन कितना भी बड़ा हो
बायोडाटा छोटे ही अच्छे माने जाते हैं.
ओर हकीक़त कितनी तल्ख़ ओर भद्दी हो ...बायोडेटा में कितनी नर्म ओर खूबसूरत हो जाती है ........नहीं ?

कविता बेमिसाल है ......

अशोक कुमार पाण्डेय said...

बहुत अच्छी

कविता कहां-कहां तक जाती है न!!!
अभार इसके लिये

मनीषा पांडे said...

शायदा, संवाद से शिंबोर्स्‍का की कविताओं का एक पूरा संग्रह प्रकाशित हुआ है। जब उन्‍हें नोबेल देने की घोषणा हुई थी, तब जानती हो वह क्‍या कर रही थीं। सारी दुनिया की जगर मगर, पत्रकारों अखबारों इंटरव्‍यू और पब्लिसिटी से दूर एक गांव में अपने होने के साथ थीं, संसार के रंग और चमक से दूर। क्‍या जिंदगी को इस तरह बदल देने वाला साहित्‍य ऐसे ही नहीं रचा जाता?

Ek ziddi dhun said...

badi achhi kavita hai, Shayda. sath mein apki naseehat bhi