Wednesday, December 23, 2009

प्रेम भटकने नहीं देता

एक गडरिए ने अपनी सभी भेड़ों को चराने के बाद बाड़े में लाकर बंद कर दिया, सिवाय भेड़ के एक बच्‍चे के। जिसे वह कंधे पर बिठाकर लाया था। उसने उसे नहला-धुलाकर हरी घास खिलाई। उक्‍त नजारे को पास ही एक पेड़ के नीचे बैठे ईसा मसीह अपने शिष्‍यों सहित देख रहे थे। अंतत उन्‍होंने गडरिए से ऐसा करने का कारण पूछा, तो गडरिए ने उत्‍तर दिया-यह रोज भटक जाता है, इसलिए इसे इतना प्रेम देता हूं कि वह फिर से न भटके। यह सुनकर ईसा मसीह ने अपने शिष्‍यों से कहा-प्रेम के अभाव में ही लोग भटकते हैं और भटके हुए लोग प्रेम से ही रास्‍ते पर आते हैं, यह तुम गडरिए से सीखो।

...............................................


कितनी सुंदर बात यहां कितनी सादगी से कही गई है। इस मासूम से प्रसंग को 23 दिसंबर के दिन दैनिक भास्‍कर की साप्‍ताहिक पत्रिका मधुरिमा में पढ़ा। यहां बांटने से खुद को रोक नहीं पाई क्‍योंकि प्रेम के इतने सादे और सुंदर भाव बांटने के लिए ही होते हैं। वैसे सोचो तो प्रेम मेमने सा मासूम ही तो लगता है।

13 comments:

M VERMA said...

वाकई अत्यंत सुन्दर बात कही गयी है

Udan Tashtari said...

सुंदर बात ..सीखने योग्य.आभार!!

अजय कुमार said...

सच है ,प्रेम से भावनात्मक जुड़ाव उत्पन्न होता है

डॉ .अनुराग said...

हम्म्म !

Ek ziddi dhun said...

lekin prem ke naam par adhiktar ham kisi ko baade men kaid karna chahte hain

कंचन सिंह चौहान said...

काश हर भटकाव को प्रेम मिल जाये और हर प्रेम भटकाव को वापस ला सके....

ali said...

बाड़े में बंद भेड़ें भी कभी मेमना रही होंगी और तब उन्हें भी गडरिये नें प्रेम देकर भटकनें से बचाया होगा, गडरिया अब उन्हें मेमने की तरह से प्रेम नहीं देता पर वो भटकती नहीं !

भले ही ईसा ने ये कहा नहीं ,पर कथा कहती है की भटकाव और शायद प्रेम की भी ,कोई उम्र हुआ करती है !

prabhat gopal said...

kahani se sikhna chahie.

उन्मुक्त said...

लेकिन यह हमेशा सच न हो, कभी प्रेम भटकाता भी है?

Dr. Chandra Kumar Jain said...

बहुत अच्छी
सधी, सहज पर गहरी बात.
========================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

अमिताभ श्रीवास्तव said...

sundar. vese us akhbaar me bhi padhhaa tha aour yah bhi socha thaa ki ise prasaarit anya tarike se bhi kiyaa jaa sakataa he. aapne yah kiya, dhanyvaad

ali said...

जो था उससे बेहतर कल के लिये ...अनंत शुभकामनायें !

Ali
(31.12.09)

lalit said...

बहुत सुंदर। प्रेम की तरह।