Tuesday, August 3, 2010

तेरा पहलू, तेरे दिल की तरह आबाद रहे


उसने एक बार फिर मेरा फोन नहीं उठाया। पिछले डेढ़ दो महीने से ऐसा लगातार हो रहा है। इससे पहले दिन में तीन बार फोन करके कहती थी, यार फलां इज़ ए बास्‍टर्ड... उसने मुझे ये कहा, वो कहा। मेरा मूड खराब है यार, ये लोग ऐसे क्‍यों हैं, वैसे क्‍यों नहीं हैं। खुलेआम कहती थी, एक दिन तुम सबको लात मारकर भाग जाऊंगी और कभी पलटकर देखूंगी भी नहीं । कभी उदास होकर ये भी कहती, यार मेरी जिंदगी में कोई ऐसा आदमी कब आएगा जो मेरे प्‍यार को समझ सकेगा। अपने नए पुराने प्रेमियों को कोसते हुए हमारे बीच गालियों का एक लंबा सेशन चलता था। गालियां उन सारे पुरुषों के लिए होती थीं जिनसे या तो हमें कोई शिकायत थी या फिर जिन्‍होंने हमारा कुछ बिगाड़ा हो। हां कई बार कोई ऐसा भलामानुस भी गा‍ली खा जाता था जिसने हमारे चाहने के बावजूद हमारी तरफ न देखने की गुस्‍ताख़ी की हो।
दिल की सारी भड़ास निकालने के बाद भी उसे नींद नहीं आती। तीन चार बजने के बाद उसे जबर्दस्‍ती फोन रखने के लिए कहने पर सुनने को मिलता था, जा यार तू भी बेवफा है, साली पूरी दुनिया एक जैसी है।
देर रात होने वाली हमारी बातचीत में से ज्‍यादातर वक्‍़त मैं ख़ुद को समझदार और उसे नासमझ जताते हुए टिप्‍स देने में बिताने की कोशिश करती और ये लड़की इस‍ फिराक में रहती कि कैसे मुझे इस बात के लिए कन्विंस कर ले‍ कि हम लड़कियों को सुखी रहने के लिए flirt करना आना ही चाहिए। सच कहूं तो उसकी बातों से कई बार सहमत होते हुए भी मैं इसलिए असहमत रह जाती थी कि इसके सामने मेरी इमेज का कचरा न हो जाए। उसे एक ऐसी भोली बच्‍ची समझती थी जो दुनिया की भीड़ में भटकी हुई है, कभी वो खुद को चालाक दिखाने के फेर में गड़बड़ करती है तो कभी जबर्दस्‍ती दूसरों को इम्‍प्रेस करने के चक्‍कर में वक्‍त गंवाती है। अपनी जिम्‍मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाने के चक्‍कर में कई बार उस पर ज्‍़यादती करते हुए मैं ये भी भूल जाती थी कि मेरा फोन रखते ही वो सबसे पहला काम उन्‍हीं लोगों को फोन करने का करेगी जिनके खिलाफ़ मुझसे समझाइश ले रही है।
तो साहब, घंटों बतियाने के बाद अब ये लड़की अचानक चुप हो गई है। ज्‍यादातर वक्‍त फो़न उठाती ही नहीं। कभी उठा भी ले तो जवाब मिलता है, डार्लिंग मैं कॉलबैक करती हूं। ऐसी शिकायत सिर्फ मेरी नहीं कई लोगों की है। कोई बता रहा था कि अक्‍सर वो  ग़ायब रहने लगी है। जो लोग उसके ड्रेसिंग सेंस और ऊंची आवाज़ पर हमेशा कमेंट किया करते थे आजकल बिल्‍कुल बेरोजगार टाइप सूरत बनाकर बैठे रहते हैं। single  बैडरूम flat में अकेले रहने वाली इस आफत को यूं चुपचाप बकरी की तरह मिमियाते हुए देखने वाले आंखें चौडी़ हो रही हैं।
इन सबको पता नहीं कि क्‍या हुआ है, लेकिन मैं जानती हूं ये लड़की फिर से गिरफ़तार है इश्‍क़ में। हज़ार बार तौबा करने के बाद एक बार फिर सब्‍ज़परी और गुलफ़ाम की कहानियों में मशगूल है। तीन दिन पहले दो मिनट की बातचीत में उसने कहा नहीं यार ऐसा कुछ नहीं है। मुझे मालूम है वो झूठ बोल रही है, लेकिन इस बार मैं उसे कुछ समझाना या डांटना नहीं चाहती बल्कि ये कह देना चाहती हूं कि, ऐ छोकरी ये लड़का जो भी हो उसे अपनी जिंदगी में आने की इजाजत सिर्फ तब देना जब वो सचमुच तेरे साथ रहना चाहता हो।  इस बार मैं बिल्‍कुल तेरी कोई बात सुनने के मूड में नही हूं। न तो मैं तेरे साथ किसी गाली सेशन में शामिल होने वाली हूं और न ही तेरे टूटे दिल को सहलाने की फुर्सत मेरे पास है। गो एंड गैट मैरिड यार। ताकि फिर कभी तुझे रात के तीन बजे फोन करके मुझसे ये न कहना पड़े...I am drunk yaar, वो साला चला गया मुझे छोड़कर। How cud he ...how cud he...?
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I wish all the best to u dear ...
तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे
तुझपे गुज़रे न क़यामत शबे तन्‍हाई की।

(parveen shakir )
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10 comments:

खाली दिमाग़ said...

शायदा जी, अगर पहलू आबाद हुआ तो प्रेम चला जाएगा.. शादी में नहीं प्रेम कहानियों में बसा करता है..इसलिए निष्कर्ष मुझे जंचा नहीं

ali said...

तेज और तेज बहते , तटबंध काटते , क्षण क्षण बदलने की ख्वाहिश लिये हुए अशांत दरिया के ठहराव की उम्मीद पर ठिठक गई पोस्ट !

शहरोज़ said...

बेहद सहज होंकर भी तेज़ असर करने वाला यह संस्मरणात्मक लेख अंत में आकर खूब सीख दे जाता है.लेकिन यह ज़िंदगी है......
शे'र खूब है :
तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे
तुझपे गुज़रे न क़यामत शबे-तन्‍हाई की।

कंचन सिंह चौहान said...

ameen...

शायदा said...

yahan ladki ko prem k sath sthirta bhee chahiye...isliye uski shadi ho jane dijiye. varna phir se phone karegi.

anurag said...

phadne me maja aaya

pahlu aur dil abad nahi hua karte
'wo jahan bhi hai adoohra hai hakeekat ki tarah
wo koi khwab nahi jo mukammal ho

डॉ .अनुराग said...

शायदा जी एक कहानी पढ़ी थी किसी पाकिस्तानी मोहतरमा की....वही याद आ गयी...नाम याद करने की कोशिश कर रहा था .....

वैसे सच कहूँ...ये कहानी नहीं है ......

शायदा said...

kisi kahanhi ka churaya hua hissa samajhiye.

पारूल said...

:)

baqi...udke darvaze khul gaye..achacha lag raha hai..

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

All the best to your friend!!

"तुझपे गुज़रे न क़यामत शबे तन्‍हाई की।"
waah!